Thursday, 5 October 2017

चारागाह भूमि की मेड़बंदी के लिए कंटीले तार

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने चारागाह भूमि की मेड़बंदी के लिए कंटीले तार

से फेंसिंग कराये जाने के लिए लिखा पत्र

जयपुर। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री  राजेन्द्र राठौड़ ने केन्द्र सरकार से पत्र लिखकर अतिक्रमण से मुक्त करायी गयी चारागाह एवं गोचर भूमि की मेड़बंदी के लिए लोहे के कंटीले तार से फेंसिंग की अनुमति दिये जाने का आग्रह किया है ।

 राठौड़ ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  नरेन्द्र सिंह तोमर को इस संबंध में पत्र लिखकर अनुरोध किया है। कि चारागाह अथवा गोचर भूमि की मेड़बंदी के लिए लोहे के कंटीले तार के द्वारा फेंसिंग का कार्य अत्यधिक सामग्री प्रदान तथा टिकाउ नहीं होता है जिससे यह कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजना के अन्र्तगत नहीं कराया जा सकता।

उन्होंने केन्द्रीय ग्रामीण मंत्री को आग्रह किया कि राज्य में चारागाह भूमि की बहुतायत होने के कारण इन्हें सुरक्षित रखने के लिए मेड़़बंंदी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य का अंधिकाश भू- भाग मरुस्थलीय होने के कारण चारागाह भूमि पर डिच- कम - बंड एवं लाइव फेंसिंग का कार्य व्यावहारिक नहीं है। उन्हाेंने कहा कि लोहे के कंटीले तार द्वारा फेंसिग कार्य के माध्यम से राज्य में उपलब्ध चारागाह भूमि को ना केवल अतिक्रमण से बचाया जा सकता है बल्कि प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संबधित कार्याें का बेहतर रख रखाव हो सकता है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लक्ष्यों को नवंबर, 2017 तक कर लिया जाएगा पूर्ण

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लक्ष्यों को नवंबर, 2017 तक कर लिया जाएगा पूर्ण


जयपुर/ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुदर्शन सेठी ने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अब तक 33 हजार आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। योजना के शेष आवासों का निर्माण नवंबर, 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि 18 मार्च, 2017 को मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे और केन्द्रीय ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री ने इस योजना का शुभारंभ किया था।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में लक्ष्य 2 लाख 50 हजार 258 के विरूद्ध शत प्रतिशत जीओ टैगिंग करने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। आलोच्य अवधि में स्वीकृत आवासों के निर्माण के विरूद्ध 33 हजार आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। स्वीकृत आवासों के साथ-साथ अन्य योजनाओं में कन्जर्वेन्स के कार्य भी करवाए जा रहे हैं।

श्री सेठी ने बताया कि उक्त योजनान्तर्गत वर्ष 2017-18 के लक्ष्य 2 लाख 23 हजार 629 के विरूद्ध लाभार्थियों को शत प्रतिशत पंजीयन पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही एक लाख 68 हजार आवासों की जीओ टैगिंग कर ली गई है। शेष प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर तक शत प्रतिशत जीओ टैगिंग का लक्ष्य रखा गया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सेठी ने बताया कि इस अवधि में स्वीकृत आवासों का निर्माण फरवरी, 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। योजनान्तर्गत 2017-18 की केन्द्रीयांश की प्रथम किश्त 837 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुकी है।

योजना के तहत वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 हेतु जारी केन्द्रीयांश एवं राज्यांश सहित कुल उपलब्ध राशि रुपये 3335 करोड़ में से राशि रुपये 2380 करोड़ (71.36 प्रतिशत) व्यय हो चुकी है। राज्य के वर्ष 2016-17 के कुल लक्ष्य 2.50 लाख के लगभग 20 प्रतिशत लक्ष्य 53879 बांसवाड़ा जिले को आवंटित है। जिले के लक्ष्य 53879 के विरूद्ध 43922 आवासों (81.51 प्रतिशत) की द्वितीय किश्त जारी की जा चुकी है।

वर्ष 2017-18 के दौरान भी जिले को आवंटित 13657 लक्ष्य के विरूद्ध शत प्रतिशत जिओ टैंगिग कर 12394 स्वीकृतियां (90.75 प्रतिशत) जारी कर 2842 लाभार्थियों को प्रथम किश्त जारी की जा चुकी है, शेष 15 अक्टूबर तक जारी कर दी जायेगी। 

Wednesday, 4 October 2017

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने मकानों के पट्टे देने के लिए चलेगा अभियान

राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय

‘ग्राम’ का अगला आयोजन उदयपुर में 7 से 9 नवम्बर तक

ग्रामीण क्षेत्रों
में सरकारी भूमि पर बने मकानों के पट्टे देने के लिए चलेगा अभियान


जयपुर, 4 अक्टूबर। श्रीमती वसुन्धरा राजे की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में ग्राम के उदयपुर में आयोजन, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने मकानों के पट्टे देने के लिए अभियान चलाने, ईसीजी टेक्निशियन एवं बॉयलर अटेंडेंट के पद सृजित करने सहित मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के दूसरे चरण की समीक्षा एवं तीसरे चरण की कार्ययोजना के सम्बन्ध में जरूरी निर्णय लिए गए। 
संसदीय कार्य मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने मंत्रिमण्डल की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी मीडिया को देते हुए बताया कि मंत्रिमण्डल ने जयपुर एवं कोटा के बाद तीसरे ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) का आयोजन उदयपुर में 7 से 9 नवम्बर, 2017 तक करने को मंजूरी प्रदान की। उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित होने जा रहे इस ग्राम में लगभग तीस हजार किसान स्मार्ट फार्मिंग कन्सेप्ट, चौपाल एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से कृषि नवाचारों से रूबरू होंगे। 
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमण्डल ने राजस्थान भूराजस्व अधिनियम-1956 की धारा 92 के तहत सिवायचक भूमि को सेट अपार्ट करके ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवासों के पट्टे जारी करने के लिए अभियान चलाने का अनुमोदन किया। इसके अंतर्गत 1 जनवरी, 2017 से पहले मकान बनाकर निवास कर रहे रहवासियों का सम्बन्धित ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे किया जाएगा। राजस्व विभाग तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अभियान चलाकर पात्र व्यक्तियों को पट्टे वितरित करेंगे।

एमजेएसए-3 मरूस्थलीय क्षेत्रों में 9 दिसम्बर तथा गैर मरूस्थलीय क्षेत्रों में 20 जनवरी से
श्री राठौड़ ने बताया कि मंत्रिमण्डल की बैठक में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तीसरे चरण की कार्य योजना पर विचार-विमर्श कर मरूस्थलीय क्षेत्रों में 9 दिसम्बर, 2017 से तथा गैर मरूस्थलीय क्षेत्रों में 20 जनवरी, 2018 से अभियान का शुभारंभ करने का निर्णय लिया गया। एमजेएसए तृतीय की डीपीआर का ग्राम सभाओं में अनुमोदन मरूस्थलीय क्षेत्रों में 13 नवम्बर तक एवं गैर मरूस्थलीय क्षेत्रों में 2 जनवरी तक होगा तथा सभी कार्य 30 जून, 2018 तक पूर्ण करवा लिए जाएंगे। 

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि एमजेएसए के दूसरे चरण में 96.55 प्रतिशत कार्य पूरे किए गए। इस चरण में कुल 1,32,548 कार्याें में से 1,27,975 कार्य पूरे किए गए तथा 60 लाख से अधिक पौधे भी लगाए गए। उन्होंने बताया कि एमजेएसए के तृतीय चरण में प्रत्येक पंचायत समिति के कम से कम पांच गांव सम्मिलित किए जाएंगे। 

राजस्थान काश्तकारी (सरकारी) नियम 1955 में संशोधन का निर्णय
श्री राठौड़ ने बताया कि मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान काश्तकारी (सरकारी) नियम 1955 के नियम 7 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। इस नियम के अनुसार वर्तमान में चारागाह भूमि को कृषि एवं अकृषि प्रयोजन के लिए ग्राम पंचायत के परामर्श से सेट अपार्ट करते समय उतनी ही भूमि चारागाह के रूप में उसी ग्राम पंचायत के अन्य ग्राम में आरक्षित किए जाने का प्रावधान है। नियम में संशोधन के बाद ग्राम पंचायत में भूमि उपलब्ध नहीं होने पर सम्बन्धित ग्राम की तहसील में तथा तहसील में भी भूमि नहीं मिलने पर जिले में कहीं भी सेट अपार्ट करके चारागाह के लिए भूमि आरक्षित की जा सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए भूमि की अनुपलब्धता की समस्या दूर हो सकेगी।
 
श्रीगंगानगर में नए मिनी सचिवालय परिसर के लिए मंजूरी
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में निर्णय लिया गया कि राजस्थान राज्य गंगानगर शुगर मिल्स लि. के श्रीगंगानगर शहर में स्थित पुराने परिसर की भूमि पर प्रस्तावित मिनी सचिवालय में जिला कलक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक, जिला कोषालय एवं जिला परिषद सहित कुल 37 कार्यालय स्थानान्तरित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त न्यायालय भवनों एवं अधिवक्ता कक्षों के लिए भी इस परिसर में स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए करीब 173 करोड़ रुपये की लागत से मिनी सचिवालय सहित इन भवनों का निर्माण कराया जाएगा। 

    श्री राठौड़ ने बताया कि नए परिसरों के निर्माण के लिए श्रीगंगानगर स्थित जिला कलेक्ट्रेट परिसर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित अन्य सभी उपरोक्त कार्यालयों के वर्तमान परिसरों की भूमि के निष्पादन से करीब 158 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। 

ईसीजी टेक्निशियन एवं बॉयलर अटेंडेंट के पद सृजित

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि जिला एवं रैफरल अस्पतालों में ईसीजी टेक्नीशियन उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम-1965 की अनुसूची गु्रप ए-6 पैरामेडिकल कैडर (मेडिकल) में ईसीजी टेक्नीशियन का नया पद सृजित करने को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इस पद के लिए गणित अथवा जीव विज्ञान विषयों के साथ सीनियर सैकण्डरी या समकक्ष तथा ईसीजी टेक्नीशियन का दो वर्षीय मान्यता प्राप्त डिप्लोमा अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता होगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान पशुपालन विभाग अधीनस्थ सेवा नियम-1977 में संशोधन कर बॉयलर अटेण्डेन्ट का पद सृजित करने का अनुमोदन भी बैठक में किया गया।

मंत्रालयिक संवर्ग के नए पदनाम, पदोन्नति के लिए अनुभव में शिथिलता

श्री राठौड़ ने बताया कि विभिन्न कर्मचारी संघों की मांगों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयिक संवर्गों के लिए राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय लिपिक वर्गीय सेवा नियम-1999 में सम्मिलित पद नामों का पदनाम परिवर्तन एवं पदोन्नति के लिए निर्धारित अनुभव को कम करने को मंजूरी दी गई। लिपिक ग्रेड-द्वितीय का पदनाम बदलकर कनिष्ठ सहायक, लिपिक ग्रेड-प्रथम का वरिष्ठ सहायक, सहायक कार्यालय अधीक्षक का सहायक प्रशासनिक अधिकारी तथा कार्यालय अधीक्षक कम सहायक प्रशासनिक अधिकारी का पदनाम बदलकर अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी किया गया है। 

संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर निर्धारित चार वर्ष के अनुभव को कम करके दो वर्ष, प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर निर्धारित पांच वर्ष के अनुभव को कम करके तीन वर्ष किया गया है। संस्थापन अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए प्रशासनिक अधिकारी के पद पर निर्धारित पांच वर्ष के कार्यानुभव के स्थान पर मंत्रालयिक संवर्ग के सभी पदों पर कुल 25 वर्ष का कार्यानुभव निर्धारित किया गया है। 

श्री राठौड़ ने बताया कि पिछली सरकार के अंतिम 6 माह में राज्य के नगरीय क्षेत्रों में सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं तथा छात्रावासों को रियायती दरों पर दिए गए भू-आवंटन के 35 प्रकरणों को नियमित किए जाने का निर्णय मंत्रिमण्डल की बैठक में लिया गया। इनमें राजस्थान आवासन मण्डल द्वारा ऎसी संस्थाओं के लिए आवंटित भूमि के 9 प्रकरणों को भी नियमित किए जाने का मंजूरी दी गई।

विधानसभा के आगामी सत्र में पेश होंगे छ विधेयक

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि मंत्रिमण्डल के समक्ष विधानसभा के आगामी सत्र में आने वाले 6 विधेयकों का प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। आगामी सत्र में राजस्थान स्टेट इलेक्टि्रसिटी डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट रेस्पॉन्सिबिलिटी बिल-2017, राजस्थान लैण्ड रेवेन्यू अमेंडमेंट एंड वेलिडेशन (रिपील) बिल-2017, राजस्थान रिलीफ अंडरटेकिंग्स (स्पेशल प्रोविजंस) (अमेंडमेंट) बिल-2017, राजस्थान लेजिस्लेटिव असेम्बली मेम्बर्स (प्रीवेंशन ऑफ डिसक्वालिफिकेशन) बिल-2017, कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल-2017 तथा क्रिमिनल लॉज (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल-2017 प्रस्तुत किए जाएंगे।

श्रम विभाग में श्रम निरीक्षकों में कार्य विभाजन

श्रम विभाग में श्रम निरीक्षकों में कार्य विभाजन17 पंचायत समितियों का काम भी करेंगे निरीक्षक

बालोतरा। सहायक श्रम आयुक्त भागीरथराम चौधरी ने कार्यालय आदेश जारी कर श्रम विभाग बालोतरा में नव नियुक्त चारों श्रम निरीक्षकों मे कार्य विभाजन किया हैं। निरीक्षक अपने कार्य क्षेत्र के अनुसार भवन एवं अन्य संनिर्माण द्वारा संचालित सभी योजनाओं के क्रियान्वयन, निरीक्षण, भौतिक सत्यापन के साथ-साथ पंजीयन और श्रम विभाग से संबंधित कार्य करेंगे।

श्रम निरीक्षक मगाराम गोदारा

पंचायत समिति सिणधरी, सिवाना, समदडी, कल्याणपुऱ तथा बाडमेर तथा नगर परिषद क्षेत्र बाडमेर का कार्य करेंगे।

श्रम निरीक्षक बुधराम विश्रोई

पंचायत समिति गुडामालानी, धोरीमन्ना, सेडवा, धनाऊ तथा नगर परिषद बालोतरा।

श्रम निरीक्षण मूलाराम जाखड

पंचायत समिति बायतू, गिडा, पाटोदी, बाडमेर तथा नगर परिषद बाडमेर

श्रम निरीक्षक रामचन्द्र गढवीर

पंचायत समिति चौहटन, शिव, रामसर, गडरारोड, बालोतरा तथा नगर परिषद बालोतरा का कार्य देखेंगे।

Monday, 2 October 2017

शिलान्यास से पहले पाटोदी पंचायत समिति भवन विवादों में

प्रधान रसीदा बानों का बयान नियमानुसार नही हो रहा हैं शिलान्यास?

शिलान्यास से पहले  पाटोदी पंचायत समिति भवन विवादों में 

कार्यक्रम को राजनीतिक रूप देने का आरोप
शिलान्यास पट्टिका में भाजपा पदाधिकारियों के नाम?

दिव्य पंचायत

पाटोदी। पाटोदी पंचायत समिति भवन का शिलान्यास और उपतहसील का लोकार्पण कार्यक्रम में राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पूरे कार्यक्रम का बहिष्कार कर रही हैं। पाटोदी पंचायत समिति पुर्नगठन में बनी तथा यहां पर कांग्रेस ने विजयी हासिल करते हुए प्रधान पद पर कब्जा जमाया हैं। उक्त समिति के भवन का शिलान्यास कार्यक्रम आज दोपहर बाद होने जा रहा हैं। पूरे कार्यक्रम को राजनैतिक प्रोपेगैंडा करार देते हुए कांग्रेस बहिष्कार कर रही हैं। दिव्य पंचायत से वार्ता में पाटोदी प्रधान रसीदा बानों ने कहा कि बिना किसी नियमों से समिति से भवन का शिलान्यास किया जा रहा हैं। जिससे कांग्रेस पार्टी नही मानती हैं तथा कांग्रेस पार्टी के एक भी पदाधिकारी और पंचायत समिति सदस्य गण और कांग्रेस समर्थित सरपंच इस कार्यक्रम में भाग नही लेकर इसका पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।

पूरे कार्यक्रम को राजनैतिक रूप देने का आरोप

जानकार सूत्रों ने बताया कि पंचायत समिति के नये भवन का शिलान्यास कार्यक्रम पूरी तरह से राजनीति से किया जा रहा हैं।

यह करेंगे शिलान्यास

समिति भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में राजस्व राज्य मंत्री अमराराम चौधरी, सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी, बायतू विधायक कैलाश चौधरी करेंगे।

Sunday, 1 October 2017

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जयपुर देश में पूरे अभियान में शौचालय निर्माण में तीसरे स्थान पर

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
जयपुर देश में पूरे अभियान में शौचालय निर्माण में तीसरे स्थान पर

प्रदेश में सर्वाधिक शौचालय बनाने में अव्वल स्थान बरकरार 


 जयपुर। ‘स्वच्छ भारत अभियान‘ की भावना को साकार कर ‘सुहावणो जैपुर‘ की परिकल्पना के साथ कदमताल करते हुए जयपुर जिला पूरे देश में इस अभियान की शुरूआत से अब तक व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की दृष्टि से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। जहां तक राज्य स्तर की बात है, जयपुर गत वित्तीय वर्ष में भी सबसे अधिक टायलेट्स का निर्माण कर प्रदेश में पहले स्थान पर था, चालू वर्ष में भी अब तक की उपलब्धि के आधार पर वह प्रदेश के सभी जिलों से आगे है।

जयपुर से आगे है बंगाल के दो जिले

जिला कलक्टर  सिद्धार्थ महाजन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत वर्ष 2013-14 में हुई थी, पूरे भारत में तब से लेकर अब तक कुल व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की उपलब्धि को देखा जाए तो इसमें जयपुर जिला समूचे देश में 5 लाख 40 हजार 785 शौचालयों के निर्माण के साथ तीसरे स्थान पर है। जयपुर से आगे पश्चिम बंगाल के 24 परगना (5 लाख 98 हजार शौचालयों का निर्माण) तथा मुर्शीदाबाद (5 लाख 95 हजार 728) जिले है। ज्ञातव्य है कि पश्चिम बंगाल के जिलों का जनसंख्या घनत्व 1029 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, इसके मुकाबले राज्य के जिलों का औसत घनत्व 201 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिखरी हुई आबादी के कारण घरों में व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण मुश्किल और अधिक चुनौतीपूर्ण है।

गौरतलब है कि जयपुर जिले में अभियान के तहत अब तक बनाए गए शौचालयों की संख्या (540785) में तो प्रदेश के कई जिले पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो गए होते। जयपुर में बने टायलेट्स की इस संख्या में भरतपुर (कुल लक्ष्य-289714) एवं चितौड़गढ़ (लक्ष्य-232887) अथवा डूंगरपुर (285395) एवं टोंक (208321) या जैसलमेर (56594) एवं व बाड़मेर (359670) जैसे जिलों के समूह पूरी तरह ‘ओडीएफ‘ हो जाते है। जयपुर में जितने ‘टायलेट्स‘ बने है, उतने में जैसलमेर जैसा जिला करीब 9 बार, चितौड़गढ़ जिला करीब 2 बार और टोंक जिला भी 2 बार ‘ओडीएफ‘ हो जाता हैं। 

चालू वर्ष में भी देश में तीसरी पायदान
महाजन ने बताया कि जयपुर जिले ने एक बार फिर वर्ष 2017-18 में अब तक की उपलब्धि के आधार पर पूरे देश में ग्रामीण क्षेत्र में कुल व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की दृष्टि से भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले 6 महिनों में सर्वाधिक शौचालयों का निर्माण करने वाले जिलों में जयपुर एक लाख 17 हजार 785 शौचालयों का निर्माण करते हुए आंधप्रदेश के नैल्लोर (लगभग 2 लाख 12 हजार शौचालयों का निर्माण) एवं गुजरात के दाहोद (1,20601 शौचालय) जिलों के बाद देश के अन्य सभी जिलों से आगे तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में भी जयपुर जिला देशभर में एक साल में कुल शौचालयों के निर्माण की दृष्टि से पश्चिम बंगाल के चार जिलों मुर्शीदाबाद, साऊथ 24 परगना, मिदनापुर वेस्ट और कूच बिहार के बाद सबसे आगे रहा था, इस वर्ष जयपुर नैल्लोर एवं दाहोद के बाद पांचवे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

प्रदेश में भी सबसे आगे, गत साल में 68 प्रतिशत उपलब्धि
महाजन ने बताया कि जयपुर जिले में 5 लाख 80 हजार 310 शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य की तुलना में वर्ष 2013-14 से लेकर अब तक 5 लाख 40 हजार 785 शौचालयों का निर्माण हुआ है, इसमें से 68 प्रतिशत उपलब्धि गत एक वर्ष के दौरान हासिल की गई है। अब जिले की ग्राम पंचायतों में करीब 40 हजार टायलेट्स का निर्माण किया जाना शेष है। जिले की शेष ग्राम पंचायतों में आगामी 14 नवम्बर तक बचे हुए शौचालयों का निर्माण पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सितम्बर 2016 से सितम्बर 2017 की अवधि में जिले में 3 लाख 40 हजार शौचालयों का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत किया गया है, जो प्रदेश में एक कीर्तिमान है।


 जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने की कड़ी मेहनत


जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  आलोक रंजन ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत लगातार दूसरे वर्ष जिले को देश और प्रदेश में विशिष्ट उपलब्धि दिलाने में जिले के ग्रामीण क्षेत्र में विकास अधिकारियों के नेतृत्व में पंचायत समितियों के कार्मिकों की पूरी टीम, सरपंचगण एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। विभिन्न पंचायत समितियों में ‘ट्रिगरिंग‘ एवं प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की गई, साथ ही ‘क्रिएटिव‘ गतिविधियों के माध्यम से जनसामान्य को अधिक से अधिक जोड़ने पर बल दिया गया। बस्सी में प्रशिक्षु आईएएस ने ‘स्वच्छता चौपाल‘ लगाई, जिनमें स्वच्छता सम्बंधी लघु फिल्में दिखाई गई। गोविंदगढ़ पंचायत समिति में विकास अधिकारी ने जागरूकता के लिए ‘स्वच्छता ओलम्पिक‘ का आयोजन कराया तो दूद और पावटा में ‘वाल पेंटिंग‘ (दीवारों पर नारा लेखन) के जरिए विशेष प्रयास करते हुए ग्रामीणों को प्रेरित किया। सांभर और विराटनगर में शौचालयों के निर्माण के साथ ‘पेमेंट‘ निस्तारण के लिए अच्छा कार्य हुआ है। 

किसानों की कर्ज माफी के संदर्भ में लिये जाने वाले निर्णय के लिए 

डॉ. रामप्रताप की अध्यक्षता में कमेटी गठित 

जयपुर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने किसान प्रतिनिधियों की राज्य सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद हुए समझौते के अनुरूप किसानों के पचास हजार रूपये तक कर्ज माफी की मांग के संदर्भ में लिए जाने वाले निर्णय के लिए जिस कमेटी की घोषणा की थी, उसका गठन कर दिया गया है। जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप की अध्यक्षता में गठित यह उच्चस्तरीय विशेषज्ञ एवं तकनीकी कमेटी किसानों की कर्ज माफी के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, केरल सहित अन्य राज्यों में अपनाई गई प्रक्रिया का राजस्थान के संदर्भ में अध्ययन, परीक्षण एवं विश्लेषण तथा सभी संबंधित पक्षकारों से विचार-विमर्श कर एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी।

इस 11 सदस्यीय कमेटी में उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, कृषि मंत्री  प्रभुलाल सैनी, सहकारिता मंत्री  अजय किलक, ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, विधायक  अशोक परनामी, डिस्कॉम्स चेयरमैन  श्रीमत पांडे, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त  डीबी गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव कृषि श्रीमती नीलकमल दरबारी, प्रमुख शासन सचिव सहकारिता  अभय कुमार को सदस्य एवं प्रमुख शासन सचिव आयोजना  अखिल अरोड़ा को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में अध्यक्ष की पूर्वानुमति से विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाये जा सकेंगे। 

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