Sunday, 25 March 2018

आरएसएस का एक्स्ट्रा कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी बनना चिंताजनक- गहलोत

आरएसएस का एक्स्ट्रा कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी बनना चिंताजनक

मुख्यमंत्री की विकास यात्रा जनता को गुमराह करने की यात्रा- गहलोत

 

जयपुर,। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव  अशोक गहलोत ने कहा कि देश के अन्दर आरएसएस एक एक्स्ट्रा कॉन्सटीट्यूशनल अथोरिटी बन चुका है। दिवंगत प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के समय यही लोग संजय गांधी पर इसी प्रकार के आरोप लगाते थे। जबकि आज आरएसएस खुद एक्स्ट्रा कॉन्सटीट्यूशनल अथोरिटी के रूप में काम कर रहा है, जिसे पूरा मुल्क जानता है, जो चिंताजनक है। आज आरएसएस का सरकार में इतना दखल है कि मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री, हर बोर्ड-कारपोरेशन में, सरकार के अन्दर-बाहर कौन रहेगा, वो ही तय कर रहा है। दिल्ली और राज्यों में आरएसएस के लगभग 25 अनुषांगिक संगठनों के लोग सरकारी विभागों में लगे हुए हैं। 
शनिवार को कोटा में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा होगा कि आरएसएस को हिन्दुत्व एवं सांस्कृतिक संगठन के नाम पर लोगों को भ्रमित करने की बजाय राजनीति में खुलकर आना चाहिए और भाजपा को आरएसएस में मर्ज होकर राजनीति करनी चाहिए। परदे के पीछे से राजनीति देश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में अपनी विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर भाजपा और आरएसएस से मुकाबला करने का पूरा दमखम है। भाजपा आरएसएस मिलकर अपनी नीतियों और सिद्धान्तों के साथ कांग्रेस से सामना करे तो उचित होगा। 
 गहलोत ने मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की विकास यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह चुनरी ओढने, लटके-झटके और महिलाओं को गुमराह करने की यात्रा है। अब महिलाओं से लेकर आम आदमी सब समझ चुके हैं कि वोट लेने के उनके क्या तरीके हैं? मुख्यमंत्री जनता को खूब झांसे दे चुकी है, लेकिन अब चाहे जो कुछ करले, राजस्थान की जनता भाजपा के कुशासन को उखाड फेंकने मानस बना चुकी है। 
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उपज का वाजिब दाम नहीं मिलने से वो परेशान हैं और आर्थिक विषमता से जूझ रहा है, आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामीनाथन् रिपोर्ट के आधार पर किसानों की आय दुगनी करने का वायदा किया था लेकिन चार साल गुजरने के बाद भी उसे पूरा करने में विफल रहे हैं। दुगनी आय तो दूर रही किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री कालीचरण सर्राफ के पुत्र पर भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी द्वारा केस दर्ज करने की जानकारी मिली है, जो चार वर्ष पूर्व ही दर्ज हो जाना चाहिए था। मुख्यमंत्री की नाक के नीचे उनके मंत्री पुत्र द्वारा जब भ्रष्टाचार किया जा रहा था, पेट्रोल पम्प पर सौदे हो रहे थे, तो उन्होंने कार्यवाही क्यों नहीं की? 
 गहलोत ने कहा कि खनिज महाघोटाले में भी श्री सिंघवी को मुख्यमंत्री द्वारा बचाया जा रहा है। जानबूझकर यह केस सीबीआई को देने की बजाय लोकायुक्त को जांच के लिये सौंपा गया, ताकि लीपा-पोती करके उन्हें बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि चालीस साल का अनुभव बताता है कि लोकायुक्त अपनी भावना प्रकट कर देते हैं और सरकार कुछ नहीं कर पाती है। अगर सीबीआई को यह केस सुपुर्द किया जाता तो कई लोग जेल जाते। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री स्वयं भी भयग्रस्त थी क्योंकि उनके चहेते अधिकारी पर आंच आ रही थी। पहले मजबूरी में डर के मारे श्री सिंघवी को निलम्बित किया गया,फिर निलम्बन खत्म किया गया। अब केस समाप्त करने की तिकडम बिठाई जा रही है। जबकि हाईकोर्ट ने इस मामले में कल ही कहा है कि केस खत्म नहीं होगा, चार्जशीट लागू रहेगी। 
पूर्व मुख्यमंत्री ने बजरी के ऊपर एक प्रश्न के जवाब में कहा कि बजरी अपने आप में बडा मुद्दा है जो इस सरकार को ले डूबेगा। भाजपा सरकार के संरक्षण में बजरी माफियाओं द्वारा गत चार सालों में बजरी को लेकर जो लूट मचाई है, उससे गरीब, मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग तक के लोगों के मकान निर्माण की कीमत इसलिए बढ गयी कि बजरी की कालाबाजारी होती रही। उन्होंने कहा कि सरकार के संरक्षण में बजरी माफिया सोना काट रहे हैं और बिना मुख्यमंत्री एवं उनकी सरकार की शह के बिना यह सम्भव नहीं है कि चार साल तक बजरी माफिया लूट मचाये और सरकार देखती रह जाये।  जब तक मिलीभगत नीचे से ऊपर तक नहीं हो, ऐसा कभी हो नहीं सकता। इसकी जांच होनी चाहिए। 
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Friday, 23 March 2018

बाल विवाह होने पर उपखंड मजिस्ट्रेट के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्यवाही -अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा पर बाल विवाह रोकने के निर्देश

बाल विवाह होने पर उपखंड मजिस्ट्रेट के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्यवाही
-अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा पर बाल विवाह रोकने के निर्देश

बाड़मेर। आगामी 18 अपै्रल को अक्षय तृतीया एवं 29 अप्रैल को पीपल पूर्णिमा पर्व पर संभावित बाल विवाह को रोकने एवं बाल विवाह करने वालों के विरुद्ध बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बाल विवाह होने की स्थिति मंे संबंधित उपखंड अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह दीपक उप्रेती की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार बाल विवाह के प्रभावी रोकथाम के लिए ग्राम एवं तहसील स्तर पर पदस्थापित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, अधिकारियों, वृत्ताधिकारी, थानाधिकारीगण, पटवारियों, भू-अभिलेख निरीक्षकों, महिला अधिकार अभिकरणों एवं महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षा विभाग के अध्यापकों, नगर परिषद एवं नगरपालिका के कर्मचारियों एवं जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों तथा वार्ड पंचों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने एवं आमजन को जानकारी देकर उनमें जन जागृति उत्पन्न करने एवं दोनों पर्वों पर बाल विवाह रोके जाने की कार्यवाही कराने में अपना पूरा योगदान करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बाल विवाह के प्रभावी रोकथाम के लिए जिला ब्लॉक एवं जिला स्तर पर गठित विभिन्न सहायता समूह, महिला समूह, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, साथिन, सहयोगिनी के कोर ग्रुप को सक्रिय करना, ऐसे व्यक्ति एवं समुदाय जो विवाह सम्पन्न कराने में सहयोगी हलवाई, बैंडबाजे, पंडित, बाराती, पाण्डाल एवं टेन्ट लगाने वाले, ट्रांसपोर्ट इत्यादि पर बाल विवाह में सहयोग करने का आश्वासन लेने और उन्हें कानून की  जानकारी देने, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ चेतना बैठकों का आयोजन करने, ग्राम सभाओं में सामूहिक रूप से बाल विवाह के दुष्प्रभावों की चर्चा करने एवं रोकथाम की कार्यवाही करने, किशोरियों, महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों एवं विभिन्न विभागों के कार्यकर्ताओं में स्वास्थ्य, वन, कृषि, समाज कल्याण, प्राथमिक शिक्षा विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर बैठक आयोजित करने, विवाह के लिए छपने वाले निमंत्रण पत्र में वर-वधु की जन्म तारीख प्रिन्ट करने सहित महत्वपूर्ण बिन्दुओं को कार्ययोजना में शामिल किये जाने के आदेश दिए गए है। 
प्रभावी कार्रवाई के निर्देशः दोनों पर्वों पर बाल विवाहों की रोकथाम के संबंध में अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकने की समुचित कार्यवाही करने तथा सूचना प्राप्त होने पर बाल विवाह प्रतिषध अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्यवाही करने के साथ अक्षय तृतीया से एक माह पूर्व जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं उपखंड कार्यालय में 24 घंटे क्रियाशील कन्ट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट होंगे जिम्मेदारः बाल विवाहों के आयोजन किए जाने की स्थिति में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 6 की धारा 16 के तहत नियुक्त ‘‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों’’ उपखंड मजिस्ट्रेट्स की जवाबदेही नियत करते हुए जिनके क्षेत्र में बाल विवाह सम्पन्न होने की स्थिति में उनके विरुद्ध जिला कलक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकों को अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए हैं।

एसडीएम जाट एपीओं डीओपी में देनी होगी उपस्थिति कुछ दिन पूर्व सोश्यल मीडिया पर हटाने को लेकर लिखा था जाट ने

एसडीएम जाट एपीओं डीओपी में देनी होगी उपस्थिति

कुछ दिन पूर्व सोश्यल मीडिया पर हटाने को लेकर लिखा था जाट ने
दिव्य पंचायत न्यूज नेटवर्क



जयपुर। राजस्थान सरकार ने एक आदेश जारी कर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दबंग अधिकारी प्रभातीलाल जाट उपखंड अधिकारी टोंक को एपीओ कर दिया। हाल ही में जाट ने टोंक में 100 ट्रक से अधिक का बजरी का स्टोक पकडा था साथ ही देर रात नदी में अवैध खनन कर रहे बजरी माफियाओं के ट्रकों को जब्त करवाया था इससे टोंक के बजरी माफियाओं की दुकानदारी बंद हो गई थी। इसी को लेर एसडीएम ने कुछ दिन पूर्व सोश्यल मीडिया पर भी लिखा था कि सरकार उसे यहां से हटाना चाहती हैं। इससे पूर्व जाट का 9 महिने में ही बालोतरा से राजस्व राज्य मंत्री के दबाव मंे तबादला किया गया था। जनता में लोकप्रिय जनता के अपने शासन का अहसास करवाने वाले दबंग अधिकारी की कार्यशैली से तथाकथित नेताओं की अवैध दुकाने बंद हो रही थी इसी को लेकर जाट को बार-बार तबादलों का सामना करना पड रहा हैं। 

Wednesday, 21 March 2018

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना संबंधित कार्यशाला 26 मार्च को -गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाआंे के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना संबंधित कार्यशाला 26 मार्च को
-गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाआंे के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।

बाड़मेर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य मंे महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 26 मार्च को प्रातः 11 बजे से भगवान महावीर टाउन हाल मंे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना संबंधित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक जीतेन्द्र सिंह नरूका ने बताया कि इस दौरान संभागियांे को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के विविध पहलूआंे से रूबरू कराया जाएगा। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 5 हजार रूपए की नकद प्रोत्साहन राशि परिवार के पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती और धात्री महिलाआंे के खाते मंे सीधे अंतरित की जाती हैं। पात्र लाभार्थियांे को संस्थागत प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के तहत मातृत्व लाभ के लिए अनुमोदित मानदंडांे के अनुसार शेष नकद प्रोत्साहन प्राप्त होगा। ताकि एक महिला को औसतन 6 हजार रूपए मिल सके। उन्हांेने बताया कि इस योजना का उददेश्य नकद प्रोत्साहन के जरिए मजदूरी हानि का आंशिक मुआवजा प्रदान करना है, जिससे महिला बच्चे के जन्म से पहले एवं बाद मंे पर्याप्त आराम कर सके। इसके तहत सभी पात्र गर्भवती और धात्री महिलाएं जिनके परिवार मंे पहला बच्चा 1 जनवरी 2017 को या इसके बाद हुआ तो एक लाभार्थी केवल एक बार इस योजना के तहत लाभ ले सकता है।
कैसे मिलेगा योजना का लाभः प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भधारण के समय पंजीकरण के मामले मंे 1 हजार रूपए मिलेगी। इसके लिए एमसीपी कार्ड मंे गर्भधारण के समय से पंजीकरण का प्रमाण ,स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी, पदाधिकारी जिसकी रैंक एएनएम से कम नहीं हो, प्रमाणित करवाना होगा। इसी तरह दूसरी किश्त गर्भधारण के छह माह बाद 2 हजार रूपए दी जाएगी। तीसरी किश्त दो हजार देने का प्रावधान है। इसके लिए क्रमशः प्रसव पूर्व जांच का प्रमाण पत्र एवं बच्चे के जन्म को प्रमाण के रूप मंे स्वीकार किया जाएगा।
क्या है इस योजना का उददेश्यः देश मंे प्रत्येक तीसरी महिला कुपोषित है। प्रत्येक दूसरी महिला में एनीमिया है। ये महिलाएं कम वजन के बच्चों को जन्म देती है और अल्प पोषण जन्म से प्रारंभ होकर पूरे जीवन को प्रभावित करता है। आर्थिक सेवा सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई महिलाओं को प्रसव के एक दिन पहले तक काम करना पड़ता है और प्रसव के कुछ ही दिन बाद काम पर वापस आना पड़ता है। हालांकि उनका शरीर इस कार्य के लिए कुछ समय उपयुक्त नहीं होता है। इसके चलते शिशुओं को समय पर स्तनपान भी नहीं करा पाती हैं। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से उन महिलाओं के नुकसान की भरपाई-उचित आराम और पोषण को सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य कर्मचारी, किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के साथ नियमित रोजगार पाने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं दिया जाएगा। 
लाभार्थियों के चयन के लिए समितियांःलाभार्थियों के चयन के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर समिति के गठन का प्रावधान है। जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष कलक्टर, उपाध्यक्ष जिला परिषद सीईओ, सचिव समेकित बाल विकास विभाग के उप निदेशक होंगे। जिले के सांसद, विधायक, सीएमएचओ और आठ अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे।

देश में केवल राजस्थान में महिला आयोग के पास खुद का पुलिस बल -सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग

देश में केवल राजस्थान में महिला आयोग के पास खुद का पुलिस बल 

-सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग

 


  

जयपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सुषमा साहू ने प्रदेश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने राजस्थान राज्य महिला आयोग द्वारा किये जा रहे कायोर्ं की भी सराहना की और कहा कि पूरे देश भर में केवल राजस्थान में महिला आयोग के पास खुद का पुलिस बल है, जो कि राज्य के लिए गौरव का विषय है। 


श्रीमती साहू बुधवार को ओटीएस सभागार में राजस्थान राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित नारी सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाएं बना कर नारी को संबल प्रदान कर सकती है, लेकिन यदि महिलाओं को सच में सशक्त बनाना है तो समाज की सोच को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि जब समाज के लोग बेटियों और महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझेंगे तभी उनके अधिकारों की सुरक्षा होगी और वो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में बराबरी से खड़ी होंगी। 

इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन करने वाली एवं महिला शिक्षा तथा सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रदेश की 24 महिलाओं को सम्मानित किया गया। प्रदेश भर से चयनित इन महिलाओं ने खेल, महिला शिक्षा एवं सशक्तिकरण, जेल में बंद महिलाओं को सशक्त बनाना, महिला सुरक्षा, खेती, व्यवसाय, महिला रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रशंसनीय कार्य किया है। 

राजस्थान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती सुमन शर्मा ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इन महिलाओं ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानते हुए न केवल अपने व्यक्तित्व और जीवन को उंचाइयों तक पहुंचाया है, बल्कि अपने आस पास की महिलाओं को भी दिशा दिखाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ये सभी नारी सशक्तिकरण की मिसाल हैं, और इनसे हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिये। 

श्रीमती शर्मा ने बताया कि महिला आयोग में लम्बित मामलों को निबटाकर त्वरित न्याय दिलाना उनकी पहली प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा लम्बित मामलों की संख्या जो 32 हजार थी अब वह घटकर लगभग 5 हजार रह गई है और उनका प्रयास है कि जल्द ही यह शून्य पर आ जाए। उन्होंने बताया कि गांव देहात तक की महिलाओं की भी आयोग की पहुंच हो इसलिए जिला स्तर पर महिला जिला मंच एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सरपंच की अध्यक्षता में महिला पंचायतों का गठन किया गया है।

  इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की वार्षिक पत्रिका वसुधा का भी विमोचन किया गया। समारोह में राज्य महिला आयोग की सदस्य, सदस्य सचिव एवं अन्य अधिकारीगण, विभिन्न स्कूल कॉलेजों की छात्राएं एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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आम्र्स अनुज्ञा पत्र धारकों को यूनिक आई डी जारी करने की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई

आम्र्स अनुज्ञा पत्र धारकों को यूनिक आई डी जारी करने 

की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई 


जयपुर। राष्ट्रीय आंकड़ा कोष परियोजना (एनडीएएल) के तहत आम्र्स अनुज्ञा पत्रों के लिए यूनिक आईडी जारी करने की अवधि 31 मार्च 2018 तक बढ़ा दी गई है। अतिरिक्त जिला मजिस्टे्रट, जयपुर शहर (दक्षिण) श्री हरिसिंह मीना ने बताया कि गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेशानुसार यूनिक आइडेन्टिफिकेशन नम्बर के बिना किसी भी आयुध अनुज्ञापत्र को एक अप्रेल 2018 से वैध नहीं माना जाएगा। इस संबंध में जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्टे्रट द्वारा संबंधित आयुध अनुज्ञापत्रधारको को समय-समय पर पूर्व में भी जरिये नोटिस सूचित किया गया है।

उन्होंने बताया कि जयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्राधिकार के ऎसे अनुज्ञा पत्र धारक, जिन्होंने अभी तक यूनिक आईडी नम्बर प्राप्त नहीं किये है, वे निर्धारित प्रपत्र (एनडीएएल) के प्रत्येक कॉलम की पूर्ति कर, उसे अपने निवास से संबंधित थानाधिकारी से सत्यापित करवा कर 31 मार्च, 2018 से पूर्व जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्टे्रट कार्यालय, जयपुर की न्याय शाखा में प्रस्तुत करे। श्री मीना ने बताया कि इसके आधार पर नियमानुसार यूनिक आईडी जारी करने की प्रक्रिया सम्पादित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जो अनुज्ञा पत्र धारक यूनिक आइडेन्टिफिकेशन नम्बर प्राप्त नहीं करेंगे, वे अपने शस्त्र/आयुध अनुज्ञापत्र को स्वतः ही निरस्त समझे। साथ ही यूनिक आई डी नम्बर के अभाव में आयुध अधिनियम के तहत ऎसे अनुज्ञापत्र धारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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