Friday, 27 April 2018

कैलाश चौधरी बने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मख्यमंत्री ने सुझाया नाम! दिल्ली-जयपुर से प्रकाशित अखबार की खबर ने मचाई हलचल


कैलाश चौधरी बने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मख्यमंत्री ने सुझाया नाम!दिल्ली-जयपुर से प्रकाशित अखबार की खबर ने मचाई हलचल


photo kailash choudhry facebook page



संघ की पृष्ठभूमि और संगठन मंे पद और पकड से खुल सकती है राह

बंशीलाल चौधरी, सम्पादक दिव्य पंचायत हिन्दी समाचार पत्र9166522591, 9413662591

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पिछले 12 दिन से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद फुटबॉल बना हुआ हैं जिसका मन भाया उसका नाम जाहिर कर दिया और उसे मीडिया व सोश्यल मीडिया पर प्रसारित प्रकाशित भी किया जा रहा हैं। लेकिन अब एक अखबार की खबर ने फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। कई दिनों से आम जन के मुद्दों से ज्यादा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष कौन बनेगा इस पर चर्चाएं चल रही हैं।  मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे  नई दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि दोनों के साथ मुलाकात के बाद वसुंधरा राजे के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह इस बात का पुख्ता संकेत है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद से ही राजस्थान का अगला प्रदेशाध्यक्ष होगा।
दिल्ली व जयपुर से प्रकाशित अखबार नेशनल दुनिया ने खबर डाल कर हलचल मचा दी कि वसुंधरा ने जो नाम सौंपे हैं उनमें कैबिनेट मंत्री श्रीचंद कृपलानी, पूर्व अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी, राज्यसभा सांसद भूपेंद्र सिंह यादव और पूर्व प्रदेश महामंत्री सतीश पूनिया का नाम है। इसके अलावा बायतु से बीजेपी के विधायक और भाजपा के किसान मोर्चा के अध्यक्ष कैलाश चौधरी के अलावा भी तीन अन्य नामों की सूची मुख्यमंत्री की तरफ से संगठन महामंत्री रामलाल और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंप दी गई है।

कैलाश चौधरी हैं वसंुधरा के गुडफैथ में

युवा एवं आक्रमक तेवर से साथ छाप एवं ईमानदार राजनीति करने की छवि के बलबूते प्रदेश की राजनीति के चर्चित चेहरे कैलाश चौधरी का नाम वसुंधरा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष रख कर उन नेताओं के लिए ऐसा सबक सामने रख दिया हैं कि जो काम करता हैं फल उसी को मिलता हैं। गौरतलब रहे कि बायतू विधायक को भाजपा किसान मोर्चा का अहम पद सौंपा गया था उसे इन्होने बखूबी निभाते हुए पूरे राजस्थान के साथ भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष एक ऐस मंझे हुए नेता की छवि को पेस किया जिसका मुकाबला राजस्थान के गिने चुने नेता ही कर पाये हैं।

स्ंाघ पृष्ठभूमि और गैर जातिवाद का मिल सकता हैं फायदा

यदि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व वसुंधरा राजे की अनुशंसा पर बायतू विधायक कैलाश चौधरी को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद पर सुशोभित करता हैं तो उनके लिए संघ की पृष्ठ भूमि और गैर जातिवादी के साथ ईमानदार को बेदाग छवि महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। 

मंत्री तो नही बनने दिया अध्यक्ष बन जाएंगे!

बाडमेर सहित जयपुर के राजनीतिक गलियारों में बायतू विधायक कैलाश चौधरी का नाम चलते ही कई लोग यह चर्चा करते हुए दिख रहे हैं कि पहले मंत्री के लिए भी बायतू विधायक का नाम चला था यहां तक कि वसुंधरा के दूसरे मंत्रीमंडल विस्तार में कैलाश चौधरी का नाम फाईनल था तथा शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए रवाना भी हो चुके लेकिन भाजपा के ही एक नेता के अडंगे ने इनकोें मंत्री पद से दूर कर दिया। इसी को लेकर चर्चा हैं कि फिर से कोई टांग अडाउ नेता सामने आ गया तो कैलाश चौधरी को इस पद से दूर रहना पड सकता हैं।

  • अभी तो शुरूआत हैं

  • बायतू के विधायक अभी युवा नेताओं के गिने जाते हैं अभी से इनका नाम प्रदेशअध्यक्ष के लिए सामने आना कैलाश चौधरी के सुखद भविष्य की ओर संकेत कर रहे हैं, वैसे भी वर्तमान में संगठन के महत्वपूर्ण किसान मोर्चा को संभाल रहे हैं, फिर से सरकार बने या नही बने पर बायतू विधायक कैलाश चौधरी की संगठन में गहरी पैठ और पकड हैं जिसके बदौलत संगठन में सक्रिय भूमिका मे तो नजर आएंगे ही। अभी तो पहला चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे युवा विधायक का नाम इतने बडे पद के लिए आना बाडमेर की राजनीति के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा हैं। 


खुले मंे शौच जाने की आदत छोड़कर शौचालय का उपयोग करें:सरपंच लेगा

खुले मंे शौच जाने की आदत छोड़कर शौचालय का उपयोग करें:सरपंच लेगा








गिडा। पंचायत समिति की लापुन्दडा ग्राम पंचायत में  ग्राम स्वराज अभियान के तहत वेदांता-आयल एंड गैस तथा आरडीओ के संयुक्त तत्वावधान मंे आयोजित कार्यक्रम को  संबोधित करते हुए लापुन्दडा सरपंच बांकाराम लेगा ने कहा कि  खुले मंे शौच जाने की आदत छोड़कर नियमित रूप से शौचालय का उपयोग करें। उन्होने कहा कि पंचायतीराज संस्थाएं विकास कार्याें मंे भागीदारी के साथ सरकारी योजनाआंे की जानकारी आमजन तक पहुंचाने मंे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय लापूदड़ा के प्रधानाचार्य शिवदयाल शर्मा ने कहा कि शौचालय का नियमित रूप से इस्तेमाल करने से करीब 80 फीसदी बीमारियां दूर हो जाती है। राहुल शर्मा ने कहा कि शौचालय सबसे ज्यादा महिलाओं को जरूरत है। खुले में शौच जाने से कई प्रकार की दिक्कतंे आती है। आरडीओ के जोगाराम सारण ने स्वस्थ भारत मिशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान विद्यार्थियों मंे स्वच्छता के बारे में चित्रकला प्रतियोगिता करवाई गई। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले 11 विद्यार्थियों को पुरस्कार दिया गया। साथ ही स्वच्छता प्रेरकों को टी-शर्ट एं कैप वितरण किए गए। ब्लॉक कोऑर्डिनेटर धीराराम डोगियाल ने बताया कि ग्राम पंचायत लापुंदरा से शौचालय का नियमित उपयोग करने वाले 453 लोगांे के उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त हुए। इसमंे से 249 को 2500 रूपए प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस अवसर पर शंभू राम हनुमत सिंह, मोहन दान, मूल सिंह समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

Monday, 23 April 2018

गांव वालों की आदत से इतनी परेशान हो गई कि सरपंच बनकर रच डाला इतिहास

सच्चे मन से की गई भक्ती से भगवान खुश होते हैं- प्रेम बाईसा दूदवा के भागवत कथा का चौथा दिन

सच्चे मन से की गई भक्ती से भगवान खुश होते हैं- प्रेम बाईसा
दूदवा के भागवत कथा का चौथा दिन





बालोतरा। दूदवा गांव में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक बाल साध्वी प्रेमबाईसा ने भक्त और भगवाने के बारे मे बताते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में अपने सद्कर्मा के साथ-साथ अपने मां-बाप और भगवान को स्मरण करते रहना चाहिए।जो भक्त सच्चे मन से भगवान को याद करते हुए उनके पास भगवान दौड कर चले आते हैं। इसके लिए हमारा मन साफ होना चाहिए। कथा के दौरान विभिन्न भगवानों की झांकियां जिसमे भगवान नारायण, मां काली की झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। कथा के दौरान साध्वी प्रेमबाईसा ने राम सुमिरन हरि ने समरले, ओढ चुनर गई रे संत्संग में आदि भजनों की प्रस्तुतियां देकर सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध दिया। महंत वीरमनाथ ने नशा मुक्ति का संदेश दिया। कथा को सुनने के लिए दूदवा, मलवा, खारापार, खटटू, बागुंडी, गोल, भीमरलाई, चांदेसरा, बायतू सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों भक्तगण आ रहे हैं। इस दौरान मगाराम सारण, भीयाराम बेनीवाल, गंगाराम बाना, रहिंगाराम सारण, कुंभाराम जांणी, केहराराम बेनीवाल, सुरताराम जांणी, खेतसिंह दहिया, प्रेमाराम बाना, धुडाराम जांणी, देवाराम नाई, मूलाराम सांई, कानाराम बाना, हेमाराम प्रजापत सहित समस्त ग्रामवासी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।

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Sunday, 22 April 2018

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है

+सत्य पारिक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनितिक विश्लेषक 

दिव्यपंचायत न्यूज़ नेटवर्क

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है , क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में इतनी जगह खाली रहती है कि किसी भी नए उभरते हुए नेता और पुराने नेता को जगह की किसी भी समय कमी नहीं रहती है । कांग्रेस से छोड़कर आने वाले नेता को भाजपा सर आंखों पर बैठाती है , ठीक उसी तरह भाजपा से नाता तोड़ने वाले नेता के लिए कांग्रेस पलक पावडे बिछाए रहती है , इस कारण तीसरी राजनीतिक शक्ति के लिए कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता बचा हुआ नहीं रह सकता है जो अपने कंधों पर तीसरी राजनीतिक शक्ति को जन्म देकर सत्ता में भागीदार बना सकें।
एक जमाना था जब देश आजाद हुआ था तब राजस्थान में पूर्व राजा महाराजाओं ने एक दल का गठन किया था जो सत्ता में तो नहीं आ सका लेकिन उसने तीसरी राजनीतिक शक्ति की कमी पूर्ति करने की काफी कोशिश की । उसके बाद जनसंघ अस्तित्व में आ गया जो लंबे समय अपनी हिंदूवादी छवि को लेकर राजनीति में संघर्ष करता रहा इसी के साथ वामपंथी दल भी उदय हुए दोनों ने ही विधानसभा में मुठी भर विधायकों को पहुंचाने में सफलता भी हासिल की , लेकिन सत्ता में भागीदारी नहीं मिली । कांग्रेस से अलग हुए चौधरी चरण सिंह ने अपने नेतृत्व में दर्जनों राजनीतिक संगठनों को जन्म दिया जिनका राजस्थान में प्रतिनिधित्व दौलत राम सारण एवं कुंभाराम आर्य ने किया लेकिन वह भी सत्ता के लिए सफल नहीं हो सके ।
एक समय ऐसा आया जब राज्य में कांग्रेस ने अल्पमत की सरकार बनाकर चलाने की कोशिश की तब विपक्ष ने एकजुट होकर मुकाबला किया था , खूनी संघर्ष होने के बाद भी कांग्रेस को सत्ता विहीन नहीं कर सके । अंत में 1977 का काल ऐसा आया जिसमें सारे दल जनता पार्टी के झंडे के नीचे खड़े हो गए , हालांकि वह झंडा लोकदल का था इसी की टिकट पर सभी ने चुनाव लड़े और कांग्रेस को केंद्र और राज्यों से सत्ता से उखाड़ फेंका । लेकिन इंदिरा गांधी की राजनीतिक सूझबूझ से ढाई साल के अंतराल के बाद जनता पार्टी एक बार पुन जितने दलों को लेकर इकट्ठी हुई थी उन से कहीं ज्यादा दलों के रूप में बिखर गई और कांग्रेस ने नये रूप में सत्तारूढ़ हुई ।
उसके बाद राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी और जनता पार्टी वे लोकदल जैसे दलों का उदय हुआ जो कभी एक झंडे के नीचे नहीं आए इन्हें एक झंडे के नीचे पुनः एक बार कांग्रेस से निकले हुए वी पी सिंह ने एकत्रित किया और सत्ता का स्वाद चखाया , लेकिन ढाई साल के बाद फिर वही राम कहानी दोहराई गई और जनता दल खंड खंड होकर कहीं का नहीं रहा । आज उसका अस्तित्व राजस्थान में तो नहीं है लेकिन अन्य राज्यों में जरूर है ।
राज्य में जब भी विधानसभा चुनाव आते हैं तब कोई न कोई नेता कोशिश करता है कि वो तीसरी शक्ति के रूप में अपना अस्तित्व खड़ा करें लेकिन शिवाय असफल होने के उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता , ऐसे नेताओं में चंद्र राज सिंघवी , देवी सिंह भाटी , किरोड़ी लाल मीणा , दिग्विजय सिंह आदि नेताओं के नाम शामिल किए जा सकते हैं , अभी नया नया नाम घनश्याम तिवाड़ी का उभरा है जो आगामी विधानसभा चुनाव में कितना बड़ा तीर मारेंगे इसके बारे में अभी से पुराना इतिहास देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान में कांग्रेस भाजपा के इलावा किसी भी दल के लिए भूमि उर्वरा नहीं है

Saturday, 21 April 2018

चुनावी साल कौन होगा राजस्थान नौकरशाह का मुख्या, बढेगा एनसी का कार्यकाल या फिर नया नाम आएगा सामने

चुनावी साल
कौन होगा राजस्थान नौ
करशाह का मुख्या, बढेगा एनसी का कार्यकाल या फिर नया नाम आएगा सामने




दिव्य पंचायत न्यूज नेटवर्क

जयपुर। राजस्थान सरकार के प्रशासनिक मुखिया एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी निहाल चंद गोयल की सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आने के साथ ही नौकरषाही हलकों में एक बार फिर से नए सीएस को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इन दिनों प्रशासनिक हलकों में यही सवाल गूंज रहा है कि चुनावी वर्ष के ऐसे नाजुक समय में सरकार नया सीएस नियुक्त करेगी या एनसी गोयल को एक्सटेंशन देगी। चुनावी साल में गोयल ने कई मामलों में सरकार को मुश्किलों से निकाला हैं। गौरतलब है कि मुख्य सचिव एनसी गोयल अपने 3 महीने से ज्यादा के कार्यकाल में खासे सक्रिय नजर आए हैं। फाइल का फास्ट डिस्पोजल हो या निर्णय क्षमता या फिर अन्य अधिकारियों के साथ तालमेल कर काम को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाना। इन सभी पैमानों पर गोयल खरे उतरे हैं। अभी तक के कार्यकाल में इन कामों में उनकी दक्षता साफ नजर आती है...

 एससीएस से आईएएस प्रमोशन 

- इसके लिए एसीआर और बोर्ड बैठक की जरूरी प्रक्रिया तेज करवाई। इसकी वजह से बोर्ड की बैठक सही समय पर बिना किसी अड़ंगे के हो पाई और अप्रैल में 14 आरएएस आईएएस बन गये।

ग्राम सेवकों सरपंचों की मांगों पर की बातचीत 

- इन मांगों को लेकर ग्राम सेवक और सरपंच आंदोलनरत थे। 
 एनसी गोयल की सक्रियता से मामला सुलझा उन्हीं के कक्ष में मंत्री राजेंद्र राठौड़ राठौड़ ने की संबंधित पक्षों से बातचीत और मामला सुलझा।
पर्यटन इकाइयों के आसपास भूमि को लेकर मसला 
- इस मसले में भूकृआवंटन संबंधी नियम परिवर्तन को लेकर सक्रियता दिखाई।

गुर्जर आंदोलन के दौरान नेताओं पर लगे मामले इस मामले में गुर्जर नेताओं की मांग अनुसार एक्शन को तेज किया।

चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना

इस मसले पर रेजीडेंट का विरोध सामने आया तो उनके लिये प्रशासनिक पदों पर न लगने की शर्त व अन्य बिंदुओं पर निर्णय किया।

एससी एसटी एक्ट के खिलाफ हुए भारत बंद और ब्राह्मण संगठनों के कथित बन्द के मामले में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने में तत्परता दिखाई। परशुराम जयंती पर भी जब ऐसी आशंका दिखी तो जरूरी अर्द्धसैन्य बल कितने तैनात हों और क्या सुरक्षा व्यवस्था रहे इसकी पूरी समीक्षा करके निर्देश दिए।
आपको बता दें कि फास्ट डिस्पोजल करने और रिजल्ट ओरिएंटेड होने की इसी छवि के चलते हुए ही मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री और ब्यूरोक्रेसी में भी गोयल चहेते बने हुए हैं। ऐसे में उनके 3 माह के एक्सटेंशन की चर्चाएं जोरों पर है।

दूदवा में भागवत कथा का दूसरा दिन उमडा भक्तोे का सैलाब


भगवान स्वयं उपस्थित होकर सुनते है कथाः बाल साध्वी प्रेम बाईसादूदवा में  भागवत कथा का दूसरा दिन उमडा भक्तोे का सैलाब

बालोतरा। निकटवर्ती दूदवा गांव में  मां रूपादे मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शुरू हुई मद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचन करते हुए बाल साध्वी प्रेम बाईसा ने कहा कि जहां-जहां भी परमपिता परमात्मा के लीलावतारों की कथा प्रवचन और गुणगान होता है वहां पर भगवान स्वयं सूक्ष्म रूप में उपस्थित होकर कथा का श्रवण करते है। 
उन्होनें श्रीमद्भागवत महापुराण पर प्रवचन के दौरान सत्संग की महिमा का बखान करते हुए कहा कि दुनिया भर में आज अराजकता का माहौल बन रहा है। मगर इसके बावजूद सत्संग के कारण यह पृथ्वी मौजूद है। अन्यथा कब का प्रलय हो जाता। उन्होनें कहा कि जब-.जब भी धरती पर पाप और अत्याचार बढ़े है। तब भगवान ने स्वयं विविध रूपों में अवतार लेकर पापियो-ं.अत्याचारियों का संहार कर अपने भक्तों को भयमुक्त किया है। त्रेता युग में भी जब पृथ्वी पर लंका नरेश एवं राक्षसराज रावण के पाप अत्याधिक बढ़ गए थे। उस समय भगवान श्रीराम के रूप में रधुकुल में नर रूप में अवतार लेना पड़ा था। इसी प्रकार द्वापर युग में कंस के अत्याचारों से अपने भक्तों को मुक्त कराने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था।
बाल साध्वी ने  कथा के दूसरे दिन महाभारत काल में भगवान की लीलाओं के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो आपसे दुश्मनी रखता है उससे प्रेम कीजिए वह अपने आप दुश्मनी भूल जाएगा। उन्होनें बताया कि वर्तमान समय में हमें संस्कार विहीन करने का कुचक्र चलाया जा रहा है। जिसके कारण मानव पथभ्रष्ट होता जा रहा है। मगर संतों के बताए मार्ग का अनुसरण कर एवं भगवान के नाम के सुमिरन से समूचे विश्व का कल्याण संभव है।

कथा सुनने को उमडे भक्त भाविक

  • ग्रामीण कुभाराम जांणी ने बताया कि कथा सुनने को लेकर दूदवा सहित आज-पास के क्षेत्र के हजारों की संख्या में भक्त भाविक आ रहे हैं तथा भक्त भाव में सरोबार होकर झूमते नजर आते हैं, कथा को लेकर ग्रामीणोें द्वारा भक्तों के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई हैं। पांडाल में महिलाआ और पुरूष भक्तों के लिए बैठने की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के दूसरे दिन राजस्व राज्य मंत्री अमराराम चौधरी, महंत प्रतापपुरी महाराज ने शिरकत किया।]


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