Monday, 23 April 2018

सच्चे मन से की गई भक्ती से भगवान खुश होते हैं- प्रेम बाईसा दूदवा के भागवत कथा का चौथा दिन

सच्चे मन से की गई भक्ती से भगवान खुश होते हैं- प्रेम बाईसा
दूदवा के भागवत कथा का चौथा दिन





बालोतरा। दूदवा गांव में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक बाल साध्वी प्रेमबाईसा ने भक्त और भगवाने के बारे मे बताते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में अपने सद्कर्मा के साथ-साथ अपने मां-बाप और भगवान को स्मरण करते रहना चाहिए।जो भक्त सच्चे मन से भगवान को याद करते हुए उनके पास भगवान दौड कर चले आते हैं। इसके लिए हमारा मन साफ होना चाहिए। कथा के दौरान विभिन्न भगवानों की झांकियां जिसमे भगवान नारायण, मां काली की झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। कथा के दौरान साध्वी प्रेमबाईसा ने राम सुमिरन हरि ने समरले, ओढ चुनर गई रे संत्संग में आदि भजनों की प्रस्तुतियां देकर सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध दिया। महंत वीरमनाथ ने नशा मुक्ति का संदेश दिया। कथा को सुनने के लिए दूदवा, मलवा, खारापार, खटटू, बागुंडी, गोल, भीमरलाई, चांदेसरा, बायतू सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों भक्तगण आ रहे हैं। इस दौरान मगाराम सारण, भीयाराम बेनीवाल, गंगाराम बाना, रहिंगाराम सारण, कुंभाराम जांणी, केहराराम बेनीवाल, सुरताराम जांणी, खेतसिंह दहिया, प्रेमाराम बाना, धुडाराम जांणी, देवाराम नाई, मूलाराम सांई, कानाराम बाना, हेमाराम प्रजापत सहित समस्त ग्रामवासी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।

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Sunday, 22 April 2018

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है

+सत्य पारिक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनितिक विश्लेषक 

दिव्यपंचायत न्यूज़ नेटवर्क

राजस्थान में अब 21वीं सदी में तीसरे दल का स्वपन देखना है बेकार लगता है , क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में इतनी जगह खाली रहती है कि किसी भी नए उभरते हुए नेता और पुराने नेता को जगह की किसी भी समय कमी नहीं रहती है । कांग्रेस से छोड़कर आने वाले नेता को भाजपा सर आंखों पर बैठाती है , ठीक उसी तरह भाजपा से नाता तोड़ने वाले नेता के लिए कांग्रेस पलक पावडे बिछाए रहती है , इस कारण तीसरी राजनीतिक शक्ति के लिए कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता बचा हुआ नहीं रह सकता है जो अपने कंधों पर तीसरी राजनीतिक शक्ति को जन्म देकर सत्ता में भागीदार बना सकें।
एक जमाना था जब देश आजाद हुआ था तब राजस्थान में पूर्व राजा महाराजाओं ने एक दल का गठन किया था जो सत्ता में तो नहीं आ सका लेकिन उसने तीसरी राजनीतिक शक्ति की कमी पूर्ति करने की काफी कोशिश की । उसके बाद जनसंघ अस्तित्व में आ गया जो लंबे समय अपनी हिंदूवादी छवि को लेकर राजनीति में संघर्ष करता रहा इसी के साथ वामपंथी दल भी उदय हुए दोनों ने ही विधानसभा में मुठी भर विधायकों को पहुंचाने में सफलता भी हासिल की , लेकिन सत्ता में भागीदारी नहीं मिली । कांग्रेस से अलग हुए चौधरी चरण सिंह ने अपने नेतृत्व में दर्जनों राजनीतिक संगठनों को जन्म दिया जिनका राजस्थान में प्रतिनिधित्व दौलत राम सारण एवं कुंभाराम आर्य ने किया लेकिन वह भी सत्ता के लिए सफल नहीं हो सके ।
एक समय ऐसा आया जब राज्य में कांग्रेस ने अल्पमत की सरकार बनाकर चलाने की कोशिश की तब विपक्ष ने एकजुट होकर मुकाबला किया था , खूनी संघर्ष होने के बाद भी कांग्रेस को सत्ता विहीन नहीं कर सके । अंत में 1977 का काल ऐसा आया जिसमें सारे दल जनता पार्टी के झंडे के नीचे खड़े हो गए , हालांकि वह झंडा लोकदल का था इसी की टिकट पर सभी ने चुनाव लड़े और कांग्रेस को केंद्र और राज्यों से सत्ता से उखाड़ फेंका । लेकिन इंदिरा गांधी की राजनीतिक सूझबूझ से ढाई साल के अंतराल के बाद जनता पार्टी एक बार पुन जितने दलों को लेकर इकट्ठी हुई थी उन से कहीं ज्यादा दलों के रूप में बिखर गई और कांग्रेस ने नये रूप में सत्तारूढ़ हुई ।
उसके बाद राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी और जनता पार्टी वे लोकदल जैसे दलों का उदय हुआ जो कभी एक झंडे के नीचे नहीं आए इन्हें एक झंडे के नीचे पुनः एक बार कांग्रेस से निकले हुए वी पी सिंह ने एकत्रित किया और सत्ता का स्वाद चखाया , लेकिन ढाई साल के बाद फिर वही राम कहानी दोहराई गई और जनता दल खंड खंड होकर कहीं का नहीं रहा । आज उसका अस्तित्व राजस्थान में तो नहीं है लेकिन अन्य राज्यों में जरूर है ।
राज्य में जब भी विधानसभा चुनाव आते हैं तब कोई न कोई नेता कोशिश करता है कि वो तीसरी शक्ति के रूप में अपना अस्तित्व खड़ा करें लेकिन शिवाय असफल होने के उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता , ऐसे नेताओं में चंद्र राज सिंघवी , देवी सिंह भाटी , किरोड़ी लाल मीणा , दिग्विजय सिंह आदि नेताओं के नाम शामिल किए जा सकते हैं , अभी नया नया नाम घनश्याम तिवाड़ी का उभरा है जो आगामी विधानसभा चुनाव में कितना बड़ा तीर मारेंगे इसके बारे में अभी से पुराना इतिहास देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान में कांग्रेस भाजपा के इलावा किसी भी दल के लिए भूमि उर्वरा नहीं है

Saturday, 21 April 2018

चुनावी साल कौन होगा राजस्थान नौकरशाह का मुख्या, बढेगा एनसी का कार्यकाल या फिर नया नाम आएगा सामने

चुनावी साल
कौन होगा राजस्थान नौ
करशाह का मुख्या, बढेगा एनसी का कार्यकाल या फिर नया नाम आएगा सामने




दिव्य पंचायत न्यूज नेटवर्क

जयपुर। राजस्थान सरकार के प्रशासनिक मुखिया एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी निहाल चंद गोयल की सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आने के साथ ही नौकरषाही हलकों में एक बार फिर से नए सीएस को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इन दिनों प्रशासनिक हलकों में यही सवाल गूंज रहा है कि चुनावी वर्ष के ऐसे नाजुक समय में सरकार नया सीएस नियुक्त करेगी या एनसी गोयल को एक्सटेंशन देगी। चुनावी साल में गोयल ने कई मामलों में सरकार को मुश्किलों से निकाला हैं। गौरतलब है कि मुख्य सचिव एनसी गोयल अपने 3 महीने से ज्यादा के कार्यकाल में खासे सक्रिय नजर आए हैं। फाइल का फास्ट डिस्पोजल हो या निर्णय क्षमता या फिर अन्य अधिकारियों के साथ तालमेल कर काम को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाना। इन सभी पैमानों पर गोयल खरे उतरे हैं। अभी तक के कार्यकाल में इन कामों में उनकी दक्षता साफ नजर आती है...

 एससीएस से आईएएस प्रमोशन 

- इसके लिए एसीआर और बोर्ड बैठक की जरूरी प्रक्रिया तेज करवाई। इसकी वजह से बोर्ड की बैठक सही समय पर बिना किसी अड़ंगे के हो पाई और अप्रैल में 14 आरएएस आईएएस बन गये।

ग्राम सेवकों सरपंचों की मांगों पर की बातचीत 

- इन मांगों को लेकर ग्राम सेवक और सरपंच आंदोलनरत थे। 
 एनसी गोयल की सक्रियता से मामला सुलझा उन्हीं के कक्ष में मंत्री राजेंद्र राठौड़ राठौड़ ने की संबंधित पक्षों से बातचीत और मामला सुलझा।
पर्यटन इकाइयों के आसपास भूमि को लेकर मसला 
- इस मसले में भूकृआवंटन संबंधी नियम परिवर्तन को लेकर सक्रियता दिखाई।

गुर्जर आंदोलन के दौरान नेताओं पर लगे मामले इस मामले में गुर्जर नेताओं की मांग अनुसार एक्शन को तेज किया।

चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना

इस मसले पर रेजीडेंट का विरोध सामने आया तो उनके लिये प्रशासनिक पदों पर न लगने की शर्त व अन्य बिंदुओं पर निर्णय किया।

एससी एसटी एक्ट के खिलाफ हुए भारत बंद और ब्राह्मण संगठनों के कथित बन्द के मामले में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने में तत्परता दिखाई। परशुराम जयंती पर भी जब ऐसी आशंका दिखी तो जरूरी अर्द्धसैन्य बल कितने तैनात हों और क्या सुरक्षा व्यवस्था रहे इसकी पूरी समीक्षा करके निर्देश दिए।
आपको बता दें कि फास्ट डिस्पोजल करने और रिजल्ट ओरिएंटेड होने की इसी छवि के चलते हुए ही मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री और ब्यूरोक्रेसी में भी गोयल चहेते बने हुए हैं। ऐसे में उनके 3 माह के एक्सटेंशन की चर्चाएं जोरों पर है।

दूदवा में भागवत कथा का दूसरा दिन उमडा भक्तोे का सैलाब


भगवान स्वयं उपस्थित होकर सुनते है कथाः बाल साध्वी प्रेम बाईसादूदवा में  भागवत कथा का दूसरा दिन उमडा भक्तोे का सैलाब

बालोतरा। निकटवर्ती दूदवा गांव में  मां रूपादे मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शुरू हुई मद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचन करते हुए बाल साध्वी प्रेम बाईसा ने कहा कि जहां-जहां भी परमपिता परमात्मा के लीलावतारों की कथा प्रवचन और गुणगान होता है वहां पर भगवान स्वयं सूक्ष्म रूप में उपस्थित होकर कथा का श्रवण करते है। 
उन्होनें श्रीमद्भागवत महापुराण पर प्रवचन के दौरान सत्संग की महिमा का बखान करते हुए कहा कि दुनिया भर में आज अराजकता का माहौल बन रहा है। मगर इसके बावजूद सत्संग के कारण यह पृथ्वी मौजूद है। अन्यथा कब का प्रलय हो जाता। उन्होनें कहा कि जब-.जब भी धरती पर पाप और अत्याचार बढ़े है। तब भगवान ने स्वयं विविध रूपों में अवतार लेकर पापियो-ं.अत्याचारियों का संहार कर अपने भक्तों को भयमुक्त किया है। त्रेता युग में भी जब पृथ्वी पर लंका नरेश एवं राक्षसराज रावण के पाप अत्याधिक बढ़ गए थे। उस समय भगवान श्रीराम के रूप में रधुकुल में नर रूप में अवतार लेना पड़ा था। इसी प्रकार द्वापर युग में कंस के अत्याचारों से अपने भक्तों को मुक्त कराने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था।
बाल साध्वी ने  कथा के दूसरे दिन महाभारत काल में भगवान की लीलाओं के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो आपसे दुश्मनी रखता है उससे प्रेम कीजिए वह अपने आप दुश्मनी भूल जाएगा। उन्होनें बताया कि वर्तमान समय में हमें संस्कार विहीन करने का कुचक्र चलाया जा रहा है। जिसके कारण मानव पथभ्रष्ट होता जा रहा है। मगर संतों के बताए मार्ग का अनुसरण कर एवं भगवान के नाम के सुमिरन से समूचे विश्व का कल्याण संभव है।

कथा सुनने को उमडे भक्त भाविक

  • ग्रामीण कुभाराम जांणी ने बताया कि कथा सुनने को लेकर दूदवा सहित आज-पास के क्षेत्र के हजारों की संख्या में भक्त भाविक आ रहे हैं तथा भक्त भाव में सरोबार होकर झूमते नजर आते हैं, कथा को लेकर ग्रामीणोें द्वारा भक्तों के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई हैं। पांडाल में महिलाआ और पुरूष भक्तों के लिए बैठने की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के दूसरे दिन राजस्व राज्य मंत्री अमराराम चौधरी, महंत प्रतापपुरी महाराज ने शिरकत किया।]


Friday, 20 April 2018

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में अभी से धड़ें बंदी शुरू होने लगी है

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में अभी से धड़ें बंदी शुरू होने लगी है


दिव्य पंचायत न्यूज़ नेटवर्क
 जिसमें अपनी अपनी पसंद के नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की टिकट दिलाना है , इसमें वे कितने सफल होंगे और कितने नहीं होंगे इसी पर आगामी मुख्यमंत्री के पद का निर्णय होने की आस लगाए बैठे हैं । जबकि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगी कि कांग्रेस की सरकार बनेगी तो मुख्यमंत्री कौन होगा ? वैसे पार्टी महासचिव अशोक गहलोत इसी आशा के साथ दिल्ली में बैठे हैं कि राज्य के भावी मुख्यमंत्री वही बनेंगे अगर सरकार बनी तो , इसी तरह से गहलोत के केंद्रीय संगठन में जाने से प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और उनकी टीम को यह भरोसा हो चला है की अगर सरकार बनी तो मुख्यमंत्री की लॉटरी पायलट के नाम की ही निकलेगी ।
      इसी दौड़ में कांग्रेस के एक और महामंत्री डॉ सी पी जोशी भी हैं जो महामंत्री के पद पर अनफिट साबित हुए तभी उन्होंने दूसरा मार्ग अपनाया और क्रिकेट की खेल में राजनीति करने लगे , फिलहाल वे आरसीए के अध्यक्ष निर्वाचित हो चुके हैं , लेकिन उनका पद सुरक्षित नहीं है क्रिकेट की राजनीति के साथ-साथ वे अपनी लोबी के नेताओं को सक्रिय कर रहे हैं तथा आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट दिलाने का वायदा कर रहें हैं कि उनकी पहुंच राहुल गांधी तक सीधी है । एक समय जब वे प्रदेश अध्यक्ष थे तो स्वयं को राहुल गांधी का खासमखास बताकर मुख्यमंत्री पद के दावेदारी कर रहे थे लेकिन उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र से एक वोट की करारी हार मिलने के कारण वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ से आउट हो गए ।
                    गुटबन्दी की इस दौड़ में एकमात्र नेता जो इस समय कांग्रेस विधायक दल के नेता रामेश्वर डूडी हैं जिन्होने अभी तक अपना गुट बनाने की कोशिश नहीं की या वह सफल नहीं हुए , उन्हें कोई भी मुख्यमंत्री पद के योग्य या दौड़ में नहीं मानता है क्योंकि जाट जाति के दिग्गज नेता भी मुख्यमंत्री की दौड़ में असफल रहा चुके हैं इसलिए वह कभी सचिन पायलट के तो कभी अशोक गहलोत के आगे पीछे चलते रहते हैं , जाट जाति के होने के बावजूद भी उन्होंने जाट जाति के नेताओं को अपने साथ एकत्रित नहीं किए क्योंकि उनमें नेतृत्व की भारी कमी है जो उनके आड़े आ रही है विधानसभा में भी मैं कोई ऐसा अपना स्थान तय नहीं कर पाए जिससे कहा जाए कि वह कांग्रेस के सशक्त जाट नेता हैं , इस कारण जाट जाति के वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों तरह के नेता उनसे दूरियां बनाए रखते हैं ।
                            उपरोक्त तीनों नेताओं के अलावा कोई ऐसा नेता फिलहाल प्रदेश कांग्रेस में नजर नहीं आ रहा जो भावी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बने या दावेदारी करें अन्य वरिष्ठ नेता जो कभी मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे थे वह राजनीति के ठंडे पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं कुल मिलाकर स्थिति यह है की अशोक गहलोत और सचिन पायलट की बजाए डॉक्टर सीपी जोशी कहीं भी सक्रिय नहीं है और आगामी चुनाव के नजदीक आते आते हैं इस दौड़ में ठीक वैसे ही कूदेंगे जैसे " बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना " क्योंकि उनके नाम के साथ एक बदकिस्मत और फ्लॉप नेता का किताब चस्पा हो चुका है , जिससे पीछा छुड़ाना उनके बस की बात नहीं है क्योंकि वह तुनकमिजाज होने के साथ-साथ अकड़ू भी है इसी कारण आरसीए में भी उनकी दाल ज्यादा दिन गलने वाली नहीं है ।
             आगामी विधानसभा चुनाव नवंबर के अंत में होना संभावित है उससे पहले प्रदेश कांग्रेस में उम्मीदवारी को लेकर बड़ा शीत युद्ध होगा जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा महामंत्री अशोक गहलोत भारी पड़ेंगे लेकिन टांग फंसाने का काम डॉक्टर जोशी से ज्यादा सचिन पायलट करेंगे जिनके साथ प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री रहेंगे , ऐसा सोचा जा रहा है लेकिन अशोक गहलोत के कांग्रेस मुख्यालय का सर्वे सर्वा होने के कारण टिकटार्थियों की भीड़ सबसे ज्यादा उनकी तरफ ही आकर्षित रहेगी जिसकी शुरुआत अभी से हो रही है , गहलोत ही प्रदेश के एकमात्र नेता ऐसे हैं जो राज्य की 200 विधानसभा सीटों में बराबर की पकड़ रखते हैं इसी कारण उनकी नजरों में जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार की संख्या अंगुलियों पर रहती है ।
#सत्य पारीक साहित्यकार एवं राजनीतिक विशेषज्ञ

Wednesday, 18 April 2018

भाजपा प्रदेषाध्यक्ष परनामी का इस्तीफा मंजूर, कौन बनेगा नया अध्यक्ष पढे पूरी खबर

भाजपा प्रदेषाध्यक्ष परनामी का इस्तीफा मंजूर, कौन बनेगा नया अध्यक्ष पढे पूरी खबर
षेखात के नाम को मैडम की ना, पारिक के नाम पर बन सकती हैं सहमती




जयपुर। भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफे को मंजूरी दे दी है। अब उनकी जगह पर नए प्रदेशाध्यक्ष के नाम का जल्द ही ऐलान कर दिया जाएगा। हालांकि अभी तक यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि नया प्रदेशाध्यक्ष कौन होगा, लेकिन नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर कयासों का दौर जारी है। इनमें कई नामों को लेकर चर्चाएं जोरों पर है। परनामी को केन्द्रीय कार्यसमिति में जगह दी गई हैं।
जानकार सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की कवायदें जारी है। इसी को लेकर प्रदेश में पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष भी बदला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पूर्व ही पार्टी महासचिव रामलाल ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से फोन पर वार्ता कर प्रदेशाध्यक्ष बदले जाने के बारे में चर्चा की थी। महासचिव ने सीएम राजे को अशोक परनामी के इस्तीफे के लिए फोन कर 3 दिन में इस्तीफा दिलाने की बात कही थी। वहीं सीएम राजे ने मामले को 15 दिन टालने का अनुरोध किया था।
वहीं दूसरी ओर, दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर आज पार्टी की बैठक भी आयोजित की जानी है, जिसमें इस बारे में विस्तार से चर्चा की जा सकती है और नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर चेहरा तय किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, नए प्रदेशाध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में है, जिसमें सुरेन्द्र पारीक और गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम आगे बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि राजस्थान में बदलाव के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जयपुर आ सकते हैं।

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