Wednesday, 13 September 2017

अतिरिक्त जिला कलक्टर बिश्नोई ने गरडिया में लगाई रात्रि चौपाल

अतिरिक्त जिला कलक्टर बिश्नोई ने गरडिया में लगाई रात्रि चौपाल
विद्युत संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु केम्प आयोजित करने के निर्देश
बाडमेर। अतिरिक्त जिला कलक्टर ओ.पी. बिश्नोई ने मंगलवार को रामसर तहसील के सीमावर्ती गरडिया ग्राम पंचायत मुख्यालय पर रात्रि चौपाल की। इस दौरान उन्होने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत जन समस्याओं की सुनवाई की तथा संबंघित अधिकारियों को समस्याओं के शीध्र निस्तारण के निर्देश दिए।
गरडिया ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित रात्रि चौपाल एवं जन सुनवाई के दौरान लोगों द्वारा विद्युत बिल समय पर प्राप्त नही होने, बिलों में सुधार की व्यवस्था नहीं होने तथा लाइनमैन का क्षेत्र विस्तृत होने से विद्युत संबंधी समस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं होने की शिकायत पर अतिरिक्त जिला कलक्टर ने डिस्कॉम के अधीक्षण अभियन्ता को रामसर अथवा गडरिया में केम्प आयोजित कर विद्युत संबंधी सम्पूर्ण समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश दिए। इसी प्रकार क्षेत्र में ढीले तारों तथा टेडे खम्बों की शीध्र मरम्मत करवाने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त जिला कलक्टर बिश्नोई ने जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियन्ता को गरडिया, सेलाऊ, जाट बस्ती, थाने की बेरी इत्यादि स्थानों पर पेयजल का कोई स्थाई स्त्रोत नहीं होने तथा पेयजल की समस्या होने पर बूठिया पेयजल स्त्रोत से आपरेशन एण्ड मेन्टीनेन्स के माध्यम से आगामी तीन माह में आम जन को पेयजल से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार उन्होने क्षेत्र में जर्जन होदियों को चिन्हीकरण कर पुनः निर्माण कराये जाने के निर्देश दिए गए। उन्होने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को बिजराड से चिने की ढाणी, दरगाह से सोमाणियों का पाडा इत्यादि क्षतिग्रस्त सडकों की शीध्र मरम्मत करवाने के निर्देश दिए।
रात्रि चौपाल के दौरान उन्होने राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए योजनाओं को लाभ उठाने को कहा। उन्होने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पशु चिकित्सालय के क्षेत्र में आने वाली ग्राम पंचायत में संबंधित पशु चिकित्सक द्वारा शिविर लगाकर पशुधन का उपचार एवं टीकाकरण करने तथा पशुपालन विभाग की उष्ट्र विकास योजना, पशु बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए। 

स्वाइनफ्लू की दवा व जांच सुविधा में कोई कमी नहीं -चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

स्वाइनफ्लू की दवा व जांच सुविधा में कोई कमी नहीं -चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री 
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री  कालीचरण सराफ ने स्वास्थ्य अधिकारियों को स्वाइनफ्लू की पर्याप्त जांच सुविधा के साथ ही दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्हाेंने एसएमएस हास्पिटल में स्वाइनफ्लू के लिए अलग से काउंटर स्थापित करने एवं बच्चों के उपचार के लिए सीरप की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
 सराफ बुधवार को मध्यान्ह राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में स्वाइनफ्लू की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में स्वाइनफ्लू के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां व जांच के लिए आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसके साथ ही स्वाइनफ्लू रोगियों के संपर्क में आने वाले चिकित्सा कर्मियों को लगाने के लिए वेक्सीन की भी समुचित व्यवस्था है।
दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध 
सराफ ने प्रदेश के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में स्वाइनफ्लू की दवा की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्हाेंने दवा विक्रेताओं के पास भी पर्याप्त मात्रा में स्वाइनफ्लू दवा की नियमित आपूर्ति पर नजर रखने के निर्देश दिए। ड्रग कंट्रोलर श्री अजय फाटक ने बताया कि दवा विक्रेता के पास स्वाइनफ्लू दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा वीनू गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में भी स्वाइनफ्लू के उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। चिकित्सा शिक्षा सचिव  आनंद कुमार ने बताया कि वे स्वयं प्रतिदिन स्वाइनफ्लू के उपचार के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के एम.डी. श्री महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि कॉरपोरेशन के पास इस समय स्वाइनफ्लू के उपचार के लिए आवश्यक दवा ऑसेल्टामिविर कैप्सूल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इस समय 75 एमजी के 5 लाख एवं बच्चों के लिए 30 एमजी के 4 लाख ऑसेल्टामिविर कैप्सूल उपलब्ध है साथ ही बच्चों के उपचार के लिए 15 हजार सीरप भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जे.के.लोन में बच्चों के उपचार के लिए सीरप भी पर्याप्त मात्र में उपलब्ध करवा दिया गया है। वरिष्ठ चिकित्सकाें ने बताया कि बच्चों के स्वाइन फ्लू उपचार के लिए सीरप नहीं होने की स्थिति में कैप्सूल को घोलकर पिलाया जा सकता है।
मिशिगन वायरस से डरने की जरूरत नहीं 
चिकित्सा मंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से विचार विमर्श के बाद बताया कि स्वाइनफ्लू का वायरस हर दो तीन वर्ष बाद अपना स्ट्रेन बदलता है उन्हाेंने कहा कि स्वाइनफ्लू के मिशिगन वायरस से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि लक्षण प्रतीत होते ही उपचार कि जरूरत है।
एसएमएस के प्रोफेसर डॉ. सी.एल. नवल ने बताया कि स्वाइन फ्लू का केलिफोर्निया स्ट्रेन की तुलना में इस वर्ष मिशिगन वायरस चिन्हि्त हुआ है। उन्होंने बताया कि इस वायरस के लिये वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है एवं प्रभावी भी है। उन्हाेंने स्पष्ट किया कि स्वाइनफ्लू के मिशिगन वायरस के उपचार में भी वही दवा कारगर है, जो कैलिफोर्निया स्ट्रेन में कारगर थी।
समीक्षा बैठक में निदेशक जन-स्वास्थ्य डॉ. वी.के. माथुर, एसएमएस के प्रिसिपल डॉ. यू.एस. अग्रवाल व अधीक्षक डॉ.डी.एस.मीणा. जेकेलोन अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे। 

डिजिटल ड्रग लाइसेंस जारी होंगे

डिजिटल ड्रग लाइसेंस जारी होंगे
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री  कालीचरण सराफ ने बुधवार को सीफू में आयोजित समारोह में प्रदेश में ड्रग लाइसेंस के डिजिटलाइजेशन कार्य का शुभारंभ किया।
सराफ ने बताया कि ड्रग लाइसेंस का डिजिटलाइजेशन करने में राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के डिजिटलाइजेशन के संकल्प को पूरा करने में स्वास्थ्य विभाग पूर्ण सक्रिय होकर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं  स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने कहा कि इस  डिजिटलाइजेशन से सेवाओं में पारदर्शिता से  व्यापक सुधार होगा ।
ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर ड्रग कंट्रोलर श्री अजय फाटक तथा डी ओ आई टी के राजीव गुजराल मौजूद थे। ड्रग कंट्रोलर संगठन के अधिकारियों व केमिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। 

Tuesday, 12 September 2017

अवैध आम्र्स लाईसेंस बनाने व बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

अपराध शाखा द्वारा गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ में हुए 

और भी खुलासे, सरगना का बड़ा व चचेरा भाई भी इस धन्धे में लिप्त



जयपुर । अतिरिक्त महानिदेशक अपराध श्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में अपराध उन्मूलन हेतु चलाये जा रहे विशेष एवं सघन अभियान के तहत अन्तर्राज्यीय अवैध एवं फर्जी आम्र्स लाईसेंस बनाने वालों एवं अन्य राज्यों से होने वाले अवैध हथियारों खरीद-फरोख्त के विरूद्ध एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि राज्य की अपराध शाखा ने प्रदेश के करौली जिले के श्रीमहावीर जी में एक बड़ी कार्यवाही कर दो अवैध हथियार तस्करों को 15 पिस्टल एवं 20 जिंदा कारतूस के गिरफ्तार किया है।
अतिरिक्त महानिदेशक अपराध श्री पंकज कुमार सिंह एवं ए.टी.एस. राजस्थान के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, श्री उमेश मिश्रा आज पुलिस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि श्रीमहावीरजी रेल्वे स्टेशन के पास स्थित अण्डर ब्रिज से मध्यप्रदेश के धार जिले के निवासी संजय पुत्र सरदया (19) आदिवासी भील एवं महेश पुत्र दुर्गा (25) आदिवासी भील को गिरफ्तार कर उनसे 15 पिस्टल एवं 20 जिन्दा कारतूस बरामद करने में सफलता हासिल की है। 

उन्होंने बताया कि वे गंगापुर निवासी लखन मीणा और फिरोज को हथियार बेचने के लिये आये थे। इन दोनों को वे पूर्व में भी अनेक बार हथियार सप्लाई कर चुके हैं। दोनों आरोपियों के पास से बरामद अवैध हस्त निर्मित सभी पिस्टलों पर मैड इन स्पेन एवं यूएसए मुद्रित है, इनमें से कुछ पिस्टलों पर साईलेन्सर भी लगे हुए हैं। 

अतिरिक्त महानिदेशक अपराध ने बताया कि आरोपियों का मुख्य सरगना बल्लू सरदार है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने बल्लू सरदार के भाई श्योदान सिंह को भी गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि उसका चचेरा भाई ईश्वर सिंह भी इसी व्यवसाय में लिप्त है। दिल्ली पुलिस ने 14 अगस्त को उसे दिल्ली में मय 20 पिस्टलों के गिरफ्तार किया है। ईश्वर सिंह को सन् 2009 में जयपुर पुलिस ने भी 5 पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था।
श्री सिंह ने बताया कि इन लोगों से और भी हथियार जब्त होने एवं वारदातें खुलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सिकलीगर जाति के लोग भारत के समस्त राज्यों में बड़ी तादाद में अवैध हथियार सप्लाई करने का कार्य करते है। 

ए.टी.एस. राजस्थान के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, श्री उमेश मिश्रा ने बताया कि एटीएस राजस्थान की विभिन्न 12 टीमों ने राजस्थान, पंजाब, जम्मू, मध्यप्रदेश में अलग-अलग जगहों पर दबिश देकर भारी मात्रा में हथियार लाईसेंस व अवैध हथियारों को जप्त किया है। उन्होंने बताया कि एटीएस को 04 माह पूर्व इस बात की पुख्ता सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह अवैध रूप से हथियार बेचने तथा खरीदने व आम्र्स लाईसेंस बनाने का कारोबार करता है तथा गिरोह से जुडे लोग वर्ष 2007-08 के लाईसेंस वर्तमान में बनाकर देते हैं और पुलिस सत्यापन भी नहीं करवाते व सम्बन्धित थाने में हथियारों का इन्द्राज नहीं करवाते है तथा जम्मू से बाहर के निवासी होने के उपरान्त भी जम्मू के पते पर लाईसेंस बनवाते हैं। 

अतिरिक्त महानिदेशक एटीएस ने बताया कि इस सन्दर्भ में श्री बीजू जॉर्ज जोसफ, महानिरीक्षक पुलिस, एटीएस व श्री विकास कुमार, पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में श्री बजरंग सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एटीएस के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया। टीम में सर्वश्री श्याम सिंह, मनीष शर्मा, राजेश दुरेजा, कामरान खान, प्रदीप सिंह, पुलिस निरीक्षक को शामिल किया गया।

 श्री मिश्रा ने बताया कि पुलिस निरीक्षक एटीएस यूनिट उदयपुर श्री श्याम सिंह रत्नू को इस बाबत् सूचना संकलन करने हेतु निर्देशित किया गया तथा एक टीम का गठन करके गिरोह से जुडे हुये संदिग्धों के सत्यापन हेतु एक टीम अबोहर पंजाब, जम्मू भेजी गई। जिसके माध्यम से गिरोह से जुडे लोगों के बारे में आसूचना संकलन किया गया। आसूचना संकलन के दौरान ही उदयपुर निवासी एक व्यक्ति ने एटीएस मुख्यालय में अजमेर निवासी जुबेर नामक व्यक्ति के खिलाफ सूचना दी की जुबेर ने आम्र्स लाईसेंस बनाने के नाम पर व हथियार उपलब्ध करवाकर उससे 12 लाख रुपये ले लिये, जबकि हथियार व आम्र्स लाईसेंस प्रथम दृष्टया संदिग्ध नजर आते हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश के देवास से भी हथियार जुबेर नामक व्यक्ति द्वारा खरीद फरोख्त के बारे में जानकारी मिली। जिसका सत्यापन एटीएस टीम द्वारा करवाया गया। सम्पूर्ण सूचना संकलन के आधार पर अवैध लाईसेंस के कारोबारियों को रंगेहाथों पकडने हेतु श्री बजरंग सिंह शेखावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एटीएस को मय टीम के सिरोही भेजा गया। 

 उक्त टीम ने जुबेर नामक व्यक्ति को बोगस ग्राहक से 02 लाख रुपये का चैक व 30 हजार रूपये नकद व 06 आम्र्स हथियारों के साथ पूछताछ हेतु पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। मुख्य अभियुक्त ने अभिरक्षा के दौरान पूछताछ में बताया कि उसके अजमेर स्थित घर पर काफी संख्या में अवैध आम्र्स लाईसेंस व अवैध हथियार पडे हुए है। जुबेर से मिली जानकारी के आधार पर राजस्थान व बाहर के राज्यों में दबिश देते हुए सैकडाें की संख्या में अवैध आम्र्स लाईसेंस, अवैध हथियार व कारतूस बरामद किये गये। पूछताछ के बाद प्रकरण दर्ज कर आरोपी जुबेर को गिरफ्तार किया गया। अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है व शीघ्र ही अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अवैध लाईसेंस व अवैध हथियार की बरामदगी कर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। जुबेर के सहयोगी विशाल व राहुल से पूछताछ की जा रही है शीघ्र ही इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी तथा इस प्रकरण से जुडे अन्य आरोपियों के खिलाफ भी बाद पूछताछ कार्यवाही की जायेगी। 

Sunday, 10 September 2017

ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना, बजट के अभाव में अटकी पहली किश्त की राशि

ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना

बजट के अभाव में अटकी पहली किश्त की राशि

2655 आवेदन, सिर्फ 328 को ही हुआ पहली किश्त का भुगतान 

गिड़ा। प्रदेश में ऊंटो की घटती संख्या लेकर चिंतिंत राज्य सरकार ने पशुपालकों को प्रोत्साहन करने को लेकर ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना शुरू की गई। गत वर्ष 2 अक्टूबर 2016 से प्रारंभ की गई योजना में बाड़मेर जिले में अब तक 26 सौं से अधिक प्रस्ताव आ चुके है, लेकिन सिर्फ 328 ऊंट पालकों को ही पहली किश्त का भुगतान किया गया हैं। बजट के अभाव में योजना का के्रेज ऊंट पालकों में नही रहा हैं। वहीं विभाग ने प्राप्त सभी आवेदनों में सभी ऊंटो का टैग लगाने का काम पूरा कर दिया हैं, लेकिन भुगतान राशि नही मिलने से ऊंट पालक निराश हैं। सभी आवेदनों की पहली किश्त के लिए करीबन 69 लाख 81 हजार रूपये की राशि की जरूरत हैं, जबकि योजना शुरु हुए एक साल होने वाला हैं।

क्या हैं योजना

राज्य सरकार ने ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना शुरु करते हुए ऊंट पालकों को 10 हजार रूपये की राशि तीन किश्तों में दी जानी है। इसके लिए ऊंटनी के प्रजनन के बाद टोडिये की आयु 1 माह होने पर 3 हजार की पहली किश्त, टोडिये की उम्र 9 माह होने पर दूसरी किश्त की राशि 3 हजार तथा 18 माह की आयु पूर्ण होने पर 4 हजार रूपये की राशि दिये जाने का प्रावधान किया गया हैं। प्रोत्साहन राशि ऊंट पालक के सीधे ही बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। इसके साथ ही भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत ऊंट का बीमा भी किया जा रहा हैं। 

बाड़मेर जिले में आए 2655 आवेदन

पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाड़मेर जिले में अब तक 2655 आवेदन आये हैं इन सभी आवेदनों की टैंगिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका हैं। इनमें से 328 पशुपालकों को पहली किश्त का भुगतान किया जा चुका हैं। विभाग के पास अभी तक 2327 ऊंट पालकों को पहली किश्त के भुगतान इंतजार हैं। टोडियों की उम्र के हिसाब से पहली किश्त का भुगतान टोडिये की उम्र 1 माह निर्धारित हैं, अब तक अधिकांश टोडियों की उम्र 9 माह से अधिक हो चुकी हैं उनको दूसरी किश्त दी जानी हैं, लेकिन पहली किश्त के भी लाले पड़ रहे हैं।

ऊंट के मुह में जीरा साबित हो रही हैं राशि

ऊंट पालकों को पहली किश्त की राशि बांटने के लिए 69 लाख 81 हजार रूपये की दरकरार हैं, जिनमें से सिर्फ 26 लाख की राशि अभी विभाग के पास आई हैं, जो महज ऊंट में मुह में जीरे के समान हैं, बताया जा रहा हैं कि ऊंट पालकों को दूसरी किश्त जमा करवाने का समय भी नजदीक आ चुका हैं, लेकिन पहली किश्त भी अभी दूर ही हैं। 

इनका कहना हैं

328 को पहली किश्त का भुगतान किया जा चुका हैं, अभी 26 लाख का बजट आया हैं इसको प्राथमिकता के साथ  ऊंट पालकों के खाते में हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
डॉ. युग भूषण वधवा
संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बाड़मेर

Wednesday, 6 September 2017

जिले में पहली बार हुआ पाडे का बीमा

बाटाडू में 20 यूनिट पशुओं का बीमा किया गया



गिड़ा। भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत बायतू उपखंड क्षेत्र के बाटाडू में पशुओं का बीमा किया गया। पशु चिकित्सक डॉ. अजय कुमार के साथ नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी के प्रतिनिधी करनाराम मांजू ने पशुपालकों को पशु अवेयरनेस के साथा भामाशाह पशु बीमा योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए अधिकाधिक पशुओं का बीमा करवाने का आह्वान किया गया। नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी के प्रतिनिधी करनाराम मांजू ने कहा कि राज्य सरकार ने पशुपालकों के सामने आ रही परेशानियों को दूर करने तथा पशुओं के मरने के बाद नया पशु खरीदने के लिए संकट उत्पन्न हो जाता था, अब राज्य सरकार पशुओं का बीमा करवा रही हैं इससे पशुओं के मरने पर बीमा राशि से पुन: पशु आसानी से खरीद सकता हैं, इसके लिए पशुपालक अपने पशुओं का बीमा करवा कर पशुओं का मोल बचा सकता हैं। उन्होने कहा कि बीपीएल और एससी, एसटी के पशुपालकों को 70 प्रतिशित अनुदान दिया जा रहा हैं।
जिले में पहली बार हुआ पाडे का बीमा
भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत बाडमेर-जैसलमेर जिले में पहली बार पाडे का बीमा किया गया हैं। भीमडा के पशुपालक हीराराम पुत्र वगताराम ने अपने पाडे का बीमा करवा कर सरकार की योजना का फायदा उठाया है।
20 यूनिट पशुओं का बीमा किया गया
पशुचिकित्सालय बाटाडू के अंतर्गत बुधवार को 20 यूनिट पशुओं का बीमा किया गया। डॉ. अजय कुमार ने बताया कि 7 यूनिट गाय, 5 यूनिट भैंस, 5 यूनिट बकरी, 2 यूनिट ऊंटनी तथा 1 यूनिट पाडे का बीमा किया गया हैं। इस दौरान जगमाल चौधरी ने सहयोगी के रूप में कार्य करते हुए बीमा करवाने में सहयोग प्रदान किया।

फोटो:- भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत पाडे का बीमा करते हुए।



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